Saturday, September 2, 2023

फवाद चौधरी जी आदित्य एल 1 के बाद

हमारी मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सूरज को लेकर एक प्वाइंट ऑफ व्यू है। सूरज हमें रोज दिख जाता है। उसके उगने और डूबने का समय आसानी से अखबार में मिल जाता है। तो हमें उतने पापड़ बेलने की जरूरत नहीं है। 

हमें पता है कि सूरज बहुत गरम है और वहां इंसानों के बसने के लिए बहुत दिक्कत है। चूंकि वहां गर्मी बहुत है इसीलिए उधर रहने पर एसी का बिल बहुत आएगा। हमारी तंगेहाल तंजीम अभी इतना ज्यादा एसी का बिल चुकाने के लिए राजी नहीं है। 

जहां तक हमें पता चला है कि सूरज से हमें कोई लोन वोन मिलने की भी गुंजाइश कम ही है। जो जितना पैसा लगा कर हम अपने सायंसदानों को सूरज पर भेजेंगे, उससे सस्ते में हमारे वजीर ए आला सऊदी और दुबई जा सकते हैं और वहां से लाख दो लाख कर्जा उधार ला सकते हैं। 

हिन्दुस्तान की आवाम को पैसे खर्चने का शौक है तो वो भेजे अपने सैटेलाइट सूरज पर या उड़ाए अपने पैसे गदर 2 देख कर। हमें ना सूरज पसंद है और ना गदर 2। 

और हिंदुस्तान यह याद रखे कि हम एक शेर मुल्क हैं, और आटा चावल की कमी के कारण भूखे शेर हैं। भूखा शेर कितना खतरनाक होता है, हिंदुस्तान की आवाम और वजीरे आजम को यह पता होना चाहिए। 

हिन्दुस्तान पहले अपने यहां टॉयलेट बनाए । हमसे सीखे। हमने खाना कम कर दिया है, हमने टॉयलेट की जरूरत ही नहीं पड़ती। 

हिन्दुस्तान के साइंटिस्ट भले ही आदित्य L1 और चंद्रयान उड़ा लें, लेकिन हमारा एक एक बच्चा मौका मिलने पर बिना किसी खास तामील के पूरा एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और स्कूल तक उड़ा सकते हैं। हम हैंडपंप से भले थोड़ा डरें, L1 और चंद्रयान से बिल्कुल भी खौफजदा नहीं हैं।

Thursday, August 24, 2023

निजी चंद्रयान 3

शुक्र मनाइए कि इसरो एक सरकारी संस्था है और चंद्रयान तीन एक सरकारी मिशन। वरना चंद्रयान का पूरा नाम होता विमल सिल्वर कोटेड इलायची प्रेजेंट्स चंद्रयान थ्री को-स्पॉन्सर्ड बाय कमलापसंद सुगंधित पान मसाला पावर्ड बाय रूपा यह आराम का मामला है।

प्रज्ञान का नाम होता ड्यूरासेल प्रज्ञान, आम बैटरी चले धरती तक, ड्यूरासेल बैटरी चले चांद तक। विक्रम रोवर को क्लब महिंद्रा हॉलीडेज स्पॉन्सर करती और कहती कि चलें चांद पर घूम आएं। टेक ऑफ , लैंडिंग सब जगह कहीं बनियान चड्डी दिखती तो कहीं मैकडॉवेल म्यूजिक सीडी। चांद की धरती को भी गोरा बनाने वाली क्रीम के विज्ञापन से पाट दिया जाता। चांद जैसा गोरापन पाने के लिए लगाएं फेयर एंड ग्लो।

टीवी पर मुफ्त में चंद्रयान की लैंडिंग नहीं दिखती और ना ही उसका एड फ्री टेलीकास्ट होता। हॉटस्टार का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेने वालों मून लैंडिंग को ही देखने को मिलती और के सीवन का इंटरव्यू कट करके नोरा फतेही का स्पेशल डांस परफॉर्मेंस दिखाया जाता। 

कुछ चीज़ें सार्वजनिक ही अच्छी हैं, जहां पर काम करने का कारण मुनाफा कमाने की होड़ की जगह कुछ नया पाना होता है। कुछ चीज़ें सरकारी ही अच्छी हैं। 



Monday, August 14, 2023

बुढ़ापा गदर और रजनीकांत



गदर चीज ही ऐसी है जो अक्सरहां बुड्ढे ही मचाते हैं। फिल्मी पर्दा हो तो 65 साल के सनी पाजी गदर मचाते हैं और असली जिंदगी वाला गदर हो तो 80 साल के बाबू कुंवर सिंह । 

जवानी तो कमबख्त काम करने और आटा चावल जमा करने में गुजर जाती है। उसके पास गदर के लिए वक्त कहां। और अगर वक्त निकाल भी लें तो वह अनुभव कहां । बुढ़ापे में वक्त भी है और अनुभव भी है । बुढ़ापे में खोने के लिए बचता नहीं। और जिसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है वह सब कुछ पाने के लिए जान लगा देता है । 

गदर के बाद ही स्वतंत्रता मिली है। इसकी कीमत समझें और सोच समझ कर उपभोग करें । वो महंगी वाली बोतलों पर लिखा रहता है ना कि Drink Responsibly!! स्वतंत्रता के साथ भी ऐसा ही है। बिना सोचे समझे अगर ज्यादा सर को चढ़ा ली तो बस नाली में जाकर गिरना तय है। बाकी चलिए रहा है। 

वैसे आप कहोगे 65 साल के सनी पाजी को आप बुड्ढा कहते हो और 72 साल के रजनीकांत सर जिनकी फिल्म जेलर भी गदर के साथ ही रिलीज हुई है उनको बुड्ढा नहीं कहते । तो हम कहेंगे कि रजनीकांत को बुढ़ापा नहीं आता , बुढ़ापे को रजनीकांत आता है और जब बुढ़ापे पर रजनीकांत आ जाता है तो वही बुढ़ापा गदर मचाता है। 

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Friday, July 21, 2023

Tips for better promotion of Oppenheimer in India..

Sabse pahle to Cillian Murphy ko bigg Boss ott ke weekend ka war wale special episode per bhejiye.. wahan per Salman Khan ke saath Murphy bhaiya bigg Boss inmates ko road safety aur ladies ki izzat kaise karte hain wale moral lessons denge aur mujhse shaadi karogi Wale gaane per ek do step karke dikhayeenge..

Robert Downey Jr India's best dancer per Jaa sakte hain.. udhar wo judges ke saath chair per baith kar Geeta maa aur sonali bendre ke saath thoda flirt karein, aur phir har ek contestant ka bachpan wala woh sapna poora karein jismein unhone apne aap ko iron man ke saath thumke lagate hue dekha tha.. do char contestant ki dukh bhari kahani sun ke aason baha dein to Oppenheimer ki chandi ho jaaye..

Emily blunt ko Kapil Sharma show per bhejiye.. wahan Kapil Sharma unse poochhenge ki Oppenheimer karne ke baad kya unhone socha tha ki unko Kapil Sharma show per aane ka mauka milega.. uske baad Krishna aur Kapil dono Hindi mein koi cheesy baat bol ke Emily blunt ko flirt karenge. Last mein kiku Sharda Emily se poochenge ki atomic bomb ki aawaz jayada tez hai ya Archana ji ki hasi!!

Matt Damon kaawaliya kaawaliya Wale gaane per reel bana kar Rajni sir se unke Ghar per mil sakte hain.. unka ashirwad lekar Oppenheimer ka Tamil version release kar sakate Hain aur phir Aisa koi hint de sakte hain ki Oppenheimer 2 mein Rajni sir ka guest appearance wala ek role hoga.. ya Oppenheimer actually KGF universe se related hai..
Finally Nolan saab Gorakhpur per jaaker yogi ji ke saath Gita press Gorakhpur Jaa sakte hain jahan woh kahenge ki Oppenheimer to bahana hai, asli to Gita sabko sabko samjhana hai.. uske baad shayad Oppenheimer UP mein tax free ho jaay. Lekin ek risk yeh bhi hai ki shayad iske baad Oppenheimer west Bengal mein ban ho jaay.. lekin kuch paane ke liye kuch khona padta hai, Aisa gita mein hi likha hai..

Baaki bache hue star cast log bade influencers jaise Sofia ansari aur Ranu mandal ke saath kacha badam Wale gaane per dance karke film ko promote kar sakte hain..

Yaad rakhiye, Gita ke aathve adhyay mein Sanjay apni divyadrishti se dekhkar batate Hain ki kaliyug mein Bina VFX ke film ban jaroor ban to sakti hai lekin Bina promotion ke India mein chal nahin sakti...





Tuesday, June 20, 2023

मधुर सरस औ अति मन भावन

सीता राम चरित अति पावन
मधुर सरस और अति मन भावन।
पुनि पुनि कितनेहू सुने सुनाए
हिय की प्यास बुझत ना बुझाए।।

राम कथा का सौंदर्य इसी में है कि यह कथा अनंत बार कही गई है और असंख्य बार सुनी गई। सुनने सुनाने का यह क्रम अनवरत चलता रहे, यही  हमारे संस्कृति की प्राणवायु समान कथा को अमर रख सकता है। आदिपुरुष के निर्देशन और पटकथा लेखन में जो गलतियां हुई हैं, उसको लेकर नाराजगी स्वाभाविक है। लेकिन ओम राउत और मनोज मुंताशिर पर गुस्सा उतना ही दिखाएं कि आगे से कोई राम कथा को गलत न सुनाए। हां इतना ध्यान अवश्य रखिए कि इतना गुस्सा ना हो जाएं कि आगे से कोई राम कथा कहने का साहस तक न करे। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे लोग भी राम भक्त बने मनोज मुंताशिर के लिए नंगी तलवार लिए घूम रहे हैं जिनकी राम भक्ति पानी के बुलबुले की तरह अस्थाई है और जिनका लक्ष्य कुछ और ही है।  याद रखिए रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि तो राम शब्द तक का गलत उच्चारण करते थे और मरा मरा का जाप करते थे। जब मरा मरा का जाप करने पर कोई वाल्मीकि बन सकता है तो फिर राम कथा कहने की इच्छा तक रखने वाला राम का प्रिय बन सकता है।
रामकथा चाहे जिस रूप में हो , मन को आनंद देने वाली और समाज में मर्यादा की पुनर्स्थापना करने वाली है। राम ने मारीच, सुबाहु, बालि और रावण जैसों को क्षमा किया और उनको बैकुंठ प्रदान किया। मरा मरा का जाप करने वाले को अपनी कथा लिखने का अवसर दे दिए तो उनके वंशज ओम और मनोज को क्षमा तो कर ही सकते हैं। जय श्री राम।

Thursday, June 15, 2023

आम आदमी की दुविधा

पलंग के नीचे जूट के बोरे पर
सजी हैं कच्चे आमों की लड़ियां,
बस पकने ही वाली हैं
और फिर आम के पकते ही शुरू हो जाएगा 
वो ही मध्यम वर्ग का यक्ष प्रश्न!!
कौन सा वाला आम पहले खाऊं?
वो वाला जो थोड़ा ज्यादा पक गया है
पिलपिला सा हो गया है ,
और कल तक खराब हो जायेगा।
या वो वाला जो आज ठीक है लेकिन
कल पिलपिला हो जायेगा।
उभर आयेंगे उसके छिलके पर काले दाग।
आज में जियूं और भोग लूं सब कुछ जी भर आज ही
या कर लूं थोड़ा सा सबर
बचा कर रखूं कल के लिए ।
खुश हो लूं आज या टाल दूं 
अपनी खुशियां कल के लिए।
पकते आमों की लड़ियां 
दिखा रही हैं आईना मुझे 
कि मिडिल क्लास हूं मैं।
जीता हूं कल के लिए
आज की कीमत पर।
करता हूं पुण्य आज कि कल किसी और
 दुनिया में स्वर्ग मिलेगा,
जबकि स्वर्ग आज मेरे सामने पड़ा है
जो कल तक पिलपिला हो जायेगा।
सामने पड़ा आम बता रहा है कि
कितना आम आदमी हूं मैं। 

Wednesday, June 7, 2023

हाय गर्मी

सूर्य से ताप पाकर धरती में जीवन का संचार हो उठता है। सोना गर्मी पाकर कुंदन बन जाता है। गर्मी से आम का कच्चा खट्टा टिकोला मीठा आम बन जाता है। मां पक्षी के डैनो का ताप अंडे में छुपे भ्रूण को नन्हें चूजों में बदल देता है। मिला जुला कर कहें तो क्षिति जल पावक गगन समीरा से बने किसी भी पिंड में ऊष्मा ताप जीवन का ही संचार करती है तो फिर मेरी शकल भागलपुर की गर्मी का ताप पाकर कुंदन की तरह क्यों नहीं चमक उठती। क्यों यह गर्मी शाम होते होते नाज़ी जर्मनी के कैंप से बचाए गए यहूदी अंकल जैसी हो जाती है। क्यों आम की तरह मेरी बोली गर्मी पाकर मीठा ना होकर एचडीएफसी के मैनेजर की तरह कड़वी और शुष्क हो जाती है। किसी पक्षी के अंडे की तरह गर्मी पाकर मुझमें जीवन का संचार क्यों नहीं होता बल्कि इस गर्मी में मुझे जीवन तक से ऊब होने लगती है। हाल यह है कि अब नोरा फतेही का वो हाय गर्मी वाला गाना सुनने तक की इच्छा नहीं बची।सुना है बड़े हो जाने के बाद सिर्फ प्रोफेसर्स और न्यायाधीशों को गर्मी की छुट्टी मिलती है। शायद उनको ही गर्मी के मौसम का वो सुख महसूस होता हो, बाकी तो बस गर्मी में सूख जाते हैं। 

Saturday, March 11, 2023

Exploitative Private Schools


In India, private schools are engaging in dishonest business practices that go unchecked by society. These schools dictate which stores parents must buy books, uniforms, notebooks, notebook covers, and shoes from. Additionally, they require students to purchase new books and uniforms every year, rendering last year's purchases useless. These items are sold at exorbitant prices, and the schools dictate when and where parents can buy them, forcing them to take time off work and wait in long lines to be exploited.

These schools blatantly disregard rules designed to prevent black market activities and monopolies. They are not truly in the business of education and should not be allowed to operate under the guise of a temple of learning or a minority institution. As someone who has attended government schools, I may be biased against these exclusive private schools and their exploitative practices. However, it seems impossible to justify their unethical behavior.





Monday, February 27, 2023

सर सर सर

हिंदी में सर को सिर भी कहते हैं। अंग्रेजी में लिखते तो सिर ( sir) हैं लेकिन पढ़ते सर हैं। वैसे हिंदी में सर का मतलब हेड होता है इंग्लिश में सर का मतलब हेड नहीं होता। लेकिन किसी संस्था के हेड को वहां के सारे लोग सर सर ही कहते हैं। स्कूल में था तो हिंदी शिक्षक को लोग हिंदी सर कहते थे, पता नहीं हिंदी सर वाले नाम में लगने वाला सर हिंदी वाला था या अंग्रेजी वाला। अंग्रेजी वाला नहीं होना चाहिए क्योंकि हिंदी वाले शिक्षक का नाम अंग्रेजी में लिया जाय यह बात सर से उपर निकल जाती है। लेकिन अगर हिंदी वाला सर माने तो उनका नाम का मतलब हिंदी माथा या हिंदी सिर हो जाता है। जो सही नहीं लगता। वैसे हिंदी सर हिंदी विभाग के हेड थे, तो उनको हिंदी सर कहना सरासर गलत भी नहीं था।

सरासर गलत तो होता है किसी वरीय पदाधिकारी के तुगलकी गलत फरमान को भी आकाशवाणी तुल्य ईश्वरी आदेश सुन कर कनीय पदाधिकारियों की सर सर सर की गूंज वाली सरसराहट। जैसे अगर आदेश हो जाय कि नहर खोद कर गंगा की धार को कानपुर से मोड़ कर वापस गंगोत्री पहुंचाना है तो भी सर के आदेश के बाद जो सर सर सर का समवेत स्वर गूंजायमान होता है उसपर विहंगो के प्रातःकालीन कलरव को भी शरम आ जाय। बेशरम ही सही लेकिन सर सर की ध्वनि का असर जबरदस्त होता है।सर सर सुन कर बड़े पदाधिकारी का सीना जहां एक तरफ चाटुकारिता पाकर छप्पन इंच का हो जाता है वहीं उनके तलवे सहलाने वाली जुबान भी ऐसे लपलपाने लगती है मानो सामने किसी ने छप्पन भोग के व्यंजन बना के रख दिया हो। किसी खास विभाग की यह खासियत नहीं है, पूरे सरकारी महकमे में ही यह व्याप्त है। यह संयोग नहीं है कि सरकार शब्द ही सर से ही शुरू होता है। बिना सर के सरकार सिर्फ कार रह जाती है। कार भी नहीं,बेकार ही कहिए। वोही कार में सिर्फ सर लग जाय तो सरकार बन जाती है और सरपट भागने लगती है।

कोई सरपंच हो , सरदार हो या हो कोई सरगना उसकी सारी सरगर्मी सर शब्द से ही आती है। सरगम में भी सर नहीं हो तो बस गम रह जाता है । दुनिया का पूरा सरकस भी सर के ही बदौलत है। सरसरी निगाह से देखें तो इस सरजमीं पर सर के बिना सब कुछ बेअसर ही है। तो क्या समझे सर!!



Sunday, February 19, 2023

ख और रव का महीन अंतर

हिंदुस्तान खासकर उत्तर भारत में सूचना पट्टों और विज्ञापन के होर्डिंग्स पर अशुद्ध हिंदी देख कर मन क्षुब्ध हो जाता है। ख व्यंजन को लिखने का तरीका रव से थोड़ा अलग है। रव में जहां र और व अलग अलग होते हैं वहीं ख में र के नीचे वाली लकीर टेढ़ी होकर व के नीचे जुड़ जाती है। इसलिए रव और ख ध्वनियों के ना केवल बोलने बल्कि लिखने में भी अंतर है। अगर इस महीन अंतर का ध्यान न रखा जाय तो अर्थ का अनर्थ हो जाता है।

पटना जंक्शन पर लगे हुए इस बोर्ड को ही देख लीजिए। यह दुकान बिहार का मशहूर उत्पाद मखाना और उससे बने अन्य उत्पाद बेचती है। लेकिन ख को अशुद्ध लिखने के कारण उसने अपना नाम मरवाना लिख रखा है। बिहार मखाना के लिए जहां प्रसिद्ध है और होने चाहता है लेकिन मारने और मरवाने के लिए शायद ही कोई प्रसिद्ध होना चाहे। ऐसे गलत बोर्ड पढ़ कर हिंदी के जानकार इस दुकान पर कुछ खाना नहीं चाहेंगे बल्कि डरकर वहां से रवाना हो जाएंगे।

Tuesday, February 14, 2023

चांद सी महबूबा

चांद अजीब सा प्राणी है। हर दिन उसका मूड अलग रहता है। चांद को पूरा देख पाना संभव तक नहीं है उसको समझना तो दूर की बात है। चांद की कलाएं और कुछ नहीं बस आपकी जिंदगी में घटता बढ़ता अंधेरा है। चांद पा कर भी कुछ खास होने वाला नहीं है क्योंकि चांद पर जिंदगी मुमकिन नहीं। चांद के पास जाकर भले ही आपका जीवन संभव नहीं हो लेकिन उसकी खूबसूरती में कसीदे कम नहीं पढ़े गए हैं । किसी भी एक कसीदे में आज तक सुनामी का जिक्र तक नहीं आया , ज्वार की लहरों का नाम नहीं आया जिससे इतनी तबाही मची रहती है। कुछ लोग कहते हैं कि नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पा लिया था लेकिन काफी लोग ऐसे भी हैं जो इसको हव्वा बताते रहते हैं। 

चांद की इतनी तारीफ सुनने के बाद यह आश्चर्य ही है कि हर दूसरी कविता हर तीसरा शेर प्रेमिका को चांद का नाम देता रहता है। चांद सी महबूबा कहना तारीफ कैसे है समझ नहीं आता। सारे शायर अपनी महबूबा को चांद तभी कहते होंगे जब अपनी महबूबा के रोज़ बदलते मूड से परेशान हो जाते हैं या उनको पता चल जाता है कि महबूबा अगर मिल गई तो जीवन संभव नहीं है। या शायद तब जब पहली बार मेकअप की मोटी परत के नीचे छुपे चेहरे के दागों का दीदार शायर पहली बार करता है। सबसे दुखी मन से शायद शायर तभी अपनी महबूबा को चांद कहता है जब उसे पता चलता है कि जिस चांदनी को वो महबूब के चेहरे का नूर और शीतल सुकून कहता रहा है वो किसी दूसरे सूरज की वजह से है।काफी गुंजाइश है कि तीसरे की एंट्री के बाद ही किसी शायर ने पहली बार प्रेमिका को चांद कहा होगा। संभवतः इसीलिए चांद की ओर हमेशा ताकते रहने वाले पक्षी को भी शास्त्रों में चातक कहा गया है। शास्त्रों के रचयिता कहना तो कुछ और चाहते होंगे लेकिन शास्त्रों में गाली तो लिख नहीं सकते इसीलिए गालीनुमा नाम चातक कह दिया। 

इंसान भी अजीब है। जिस धरती पर जिंदगी मुमकिन है , उसे इंसान अपने पैरों तले रखता है और सूखे बंजर चांद के ख्वाब देखता रहता है। इश्क जो ना कराए। 

बाकी सब ठीक है। आप सुनाओ? कल आप टेडी  बियर वाली दुकान पर दिखे थे!! सब ठीक ठाक तो है ना? 

Thursday, February 9, 2023

चलते चलते

भाई साब चल ही नहीं पा रहे थे। उनको चलाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन साहब थे कि किसी भी तरह से चले ही नहीं।  फिर उनके आस पास के चालू लोगों ने कहा कि साब आप चिल ज्यादा करते हैं इसलिए आप चल नहीं पा रहे। ना साहब चल पा रहे थे और ना ही अपनी पार्टी चला पा रहे थे। चुनाव दर चुनाव विपक्षी उनको चलता किए जा रही थी। कुछ साल पहले साहब ने पार्टी चलाने वाला काम छोड़ दिया । दिक्कत यह थी कि पार्टी  के लोग ज़िद करके बैठ गए कि साहब पार्टी तो आप ही चलाओ। लेकिन साहब थे कि चलना तो दूर अपनी जगह से हिले डुले तक नहीं।समय का पहिया चलता रहा , पार्टी के पुराने लोगों ने पार्टी की हालत देख कर " अच्छा, चलता हूं " कहना शुरू कर दिया। सब कहने लगे कि ऐसे  तो पार्टी ही चल बसेगी।

 फिर एक दिन किसी चालू चापलूस  ने कहा कि साहब, श्री मोहन दास भी पहले नमक के लिए चले थे, फिर तो ऐसा चले, चल चल कर ही ऐसे उनके भाग्य बदले कि वैसे करम दुनिया में चंद लोगों की ही होती है।  फिर भाई साब ने भी सोचा कि चिल बहुत हुआ, अब चला जाय। फिर भाई साब चलने लगे। खूब दूर दूर तक चले, दक्षिण से चले और उत्तर की तलाश में। उनकी पार्टी की धमनियों में रुका रक्त चलने लगा और साथ ही चलने लगा उनका मीडिया अभियान। खूब खबरें चलाई गई, एडिटर लोग साहब के चलने के किस्से लिखने के लिए ताबड़तोड़ कलम चलाने लगे।  टीवी पर बटेरबाजी और मुर्गे की लड़ाई की याद दिलाने वाली चर्चाओं का दौर चला। लेकिन यह सब भी कितने दिन चलता। उनकी खबरें चलाने वाले सहयोगी भी अपनी दुकान बेच कर चलते बने ।  

 चल चल कर थक जाने के बाद साहब दिल्ली पहुंचे । दिल्ली पहुंचे तो वहां भी गए जहां साल में तीन बार सत्र चलता है। साहब वहां भी अपने चलने की कहानियां चलाने लगे लेकिन वो ही पुराना कैसेट कितनी चलता। लोग कहने लगे कि भाई वो ही घिसी पिटी बात को चलता करो । साहब का मजाक उड़ता देखसाहब के लोगों को गुस्सा आ गया।  पुराना ज़माना  होता तो तलवारें चल जाती। लेकिन आज के ज़माने में तलवार से ज्यादा जुबां चलने का रिवाज है। कहने लगे कि साहब इतना चले हैं कि और कुछ नहीं चलने देंगे, यह सत्र भी नहीं। सत्र भी रुक रुक कर ही चला। जनता बेचारी दूर खड़ी सोचती रही कि आखिर चल क्या रहा है? 

साहब का चलना भले ही रुक गया हो लेकिन कहानी क्रमशः यूं ही चलती रहेगी । यही तो खासियत है कहानी और गाड़ी की, कि दोनो चलती रहती है।  इसीलिए तो एक सुपरहिट चलचित्र बनी थी ' चलती का नाम गाड़ी' । वैसे चलते चलते एक और बात बता दूं कि एक और चलचित्र है बढ़ती का नाम दाढ़ी। लेकिन दाढ़ी वाली चलचित्र कोई खास चली नहीं थी। 

चलने चलाने की इस छोटी सी कथा के अंत में इतना ही कहना है कि  चलना ही तो जिंदगी है।  बीमारों को क्या चाहिए यही कि उनकी दवा चलती रहे। दोस्तों को क्या चाहिए यही कि उनका याराना चलता रहे। व्यापारियों का व्यापार चलता रहना चाहिए, नवयुवकों और नवयुवतियों का चक्कर चलता रहना चाहिए, जाम और शाम का यह सफर चलता रहना चाहिए और चलता रहना चाहिए हमारा यह फलसफा।  पता नहीं यह सब पढ़ कर आपके दिमाग में क्या चल रहा है। आप हर चीज में गंभीरता और दर्शन तलाशना बंद करिए। कभी कभी हल्का फुल्का हंसी मजाक भी चलना चाहिए। चलता हूं। 

Wednesday, February 8, 2023

निरंतर संवाद का विषय

रामायण में एक प्रसंग आता है राम रावण युद्ध के बाद का। अपनी नाभि में राम का अस्त्र लिए लंकेश रावण युद्ध क्षेत्र में धायल पड़े हैं। श्रीराम लक्ष्मण को रावण के जाने और उनसे ज्ञान प्राप्त करने को कहते हैं। लक्ष्मण कहते हैं कि हे राम! भला रावण मुझे ऐसा क्या ज्ञान दे सकता है जो मुझे आपसे प्राप्त नहीं हो सकता। श्रीराम कहते हैं कि रावण एक महान प्रतापी राजा था। उसने एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया और जिसके प्रताप का लोहा तीनों लोकों ने माना है। भले ही हम इक्ष्वाकु वंश के वंशज हैं लेकिन हमें अपने पूर्वजों के सान्निध्य में राज्यनीति के बारे में सीखने का कोई खास अवसर नहीं मिला। और ना ही मेरे पास राज्य चलाने का कोई अनुभव है। उसके उलट रावण के पास शासन चलाने का गहरा अनुभव है। यहां से लौटते ही मुझे अयोध्या का राजकाज सौंप दिया जायेगा। मुझ जैसे अनुभवहीन शासक को रावण से सीखने का मौका गंवाना नहीं चाहिए।

दूसरा प्रसंग आता है राम बालि युद्ध के बाद। युद्ध में घायल बालि के पास राम जाते हैं। बालि राम से कहते हैं कि आपने छल से छिप कर मुझे मारा है। आपने इस युद्ध में हिस्सा लिया जिससे आपका कोई मतलब नहीं था। श्रीराम कहते हैं कि में क्षत्रिय हूं और तुम एक वानर हो। मुझे आखेट का अधिकार है इसीलिए मैं छिप कर भी चाहूं तो आखेट कर सकता हूं। बालि प्रत्युत्तर में कहते हैं कि आप मेरे मांस का भक्षण नहीं कर सकते और मुझसे आपको कोई प्राणों का भय भी नहीं था। इसीलिए आपका मेरा अकारण आखेट करना भी अनुचित है। श्रीराम कहते हैं कि मैं अयोध्या के राजन भरत का दूत हूं और यह भूमि राजा भरत के साम्राज्य का अंग है। अपने छोटे भाई सुग्रीव की पत्नी का हरण कर तुमने अयोध्या के नियमों का उल्लंघन किया है। उन नियमों को तोड़ने का दंड देने के लिए मैं महाराज भरत का अधिकृत दूत हूं।


राम बालि प्रसंग में किसका तर्क ज्यादा सही है यह विचारणीय प्रश्न हो सकता है लेकिन उपरोक्त दोनों प्रसंगों से एक बात स्पष्ट है। भीषण प्रतिद्वंदी और युद्ध होने के बाद भी श्रीराम बालि और रावण से संवाद का पुल बनाए रखते हैं। रावण और बालि जैसे अधम पुरुषों के लिए भी श्रीराम के दरबार में संवाद की संभावना हमेशा रही । युद्ध , मतभेद या वैचारिक विभेद कभी संवाद का विकल्प नहीं हो सकते। संवाद एक शाश्वत सत्य होना चाहिए। क्योंकि विपक्षी कोई भी ही आपको हमेशा कुछ न कुछ सिखा सकता है। अगर बालि जैसा वानर मर्यादा पुरुषोत्तम को निरुत्तर कर सकने वाले तर्क दे सकता है तो हर किसी से संवाद की संभावना हमेशा ही सुखद परिणाम दे सकती है।


 दूसरी बात जो उपरोक्त दोनों प्रसंगों से उभर कर सामने आती है कि हमारे महाकाव्य अपने चरित्रों को अच्छे या बुरे के युग्म खांचों में जबरदस्ती ठूंसने का प्रयास नहीं करते। उनके चरित्र हमेशा अच्छे या बुरे होने के बजाय अच्छे और बुरे होते हैं। रावण और बालि के चरित्र का राम के द्वारा मूल्यांकन भी यही दर्शाता है। कदाचित राम द्वारा अपने आप को अनुभव हीन शासक के रूप में देखना और आगे चल कर अपनी पत्नी सीता को वनवास और अग्नि परीक्षा से गुजारना भी यही दर्शाता है कि राम भी केवल गुणों की खान नहीं हैं और उनमें भी कुछ कमियां हैं। ना राम पूर्ण रूप से पुरुषोत्तम हैं और ना रावण पूर्ण नराधम। सभी चरित्र इन दोनो चरम अवस्थाओं के बीच ही कहीं आते हैं।  इसीलिए हर किसी से संवाद और संवाद का प्रयास ना केवल वांछनीय है अपितु संस्तुत भी है।