Thursday, August 13, 2026

बड़ा होना


बच्चा चाहता है चारों दिशाओं को छूना,
चाँद की मिट्टी में अपने पैरों के निशान रखना,
बादलों के पार कोई घर बनाना।

बड़ा आदमी
बस समय पर ऑफिस पहुँचना चाहता है,
समय पर लौटना चाहता है,
और बैंक-बैलेंस में
हर साल एक अंक और जोड़ना चाहता है।

बचपन में
आसमान छोटा लगता था,
बड़े होने पर
एक थ्री बीएचके बड़ा लगने लगता है।

बच्चा बारिश में भीगकर
बारिश को जानता है,
बड़ा आदमी
बारिश में ट्रैफिक देखता है।

बच्चा पूछता है—
“मैं क्या बन सकता हूँ?”
बड़ा आदमी पूछता है—
“इससे कितना मिलेगा?”
धीरे-धीरे
हम सपनों को सुविधाओं से बदल देते हैं,
उड़ने की इच्छा को
एक अच्छी नौकरी से,
दूर जाने की चाह को
एक कार से,
और आज़ादी को
छुट्टी के दो दिनों से।

फिर एक दिन
सब कुछ पा लेने के बाद भी
अंदर से कोई बच्चा पूछता है—
“वह चाँद कहाँ गया,
जिस तक तुम जाना चाहते थे?”

बड़ा होना
शायद सपनों का छोटा होना है—
हम बड़े नहीं होते
बस तुम्हारे सपने छोटे हो जाते हैं।।

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