Saturday, October 7, 2023

मौसम और मजदूर

गर पसंद है तुम्हें बारिश, तो घर तेरा ऊंचाई पर है,
सर्दियां भाती हैं गर, तो सर तुम्हारा रजाई पर है।
लगती हैं अच्छी गर्मियां, तो हवा तेरे कमरे की तराई पर है,
हम ठहरे मजदूर, नजर हमारी मौसम पर नहीं , दो जून की कमाई पर है।

Friday, October 6, 2023

Inzamam: The heavyweight batting genius

If you were to ask any cricket enthusiast to name their top five batsmen, you'd typically hear names like Bradman, Viv Richards, Sachin Tendulkar, Lara, and Steve Waugh. Inzamam ul Haq's name seldom finds its way onto such lists, and there are valid reasons for that. Inzamam wasn't the fittest or the most agile athlete on the field. His running between the wickets often provided comic relief in cricketing circles, and his English language skills could amuse the elite. However, it's unanimous that no one would dare label Inzamam as a poor batsman. Those who witnessed his play would even argue that he was on par, if not better, than his contemporaries like Lara and Sachin.

What set Inzamam, or "Inzy bhai," apart? In one sentence, it was his extraordinary ability to seemingly have more time to play a shot—an extra second that made him exceptional and compensated for his other shortcomings. While most specialist batsmen are meticulous about their bat's size, weight, and brand, Inzamam was different. His dressing room tales reveal that he could casually pick up any bat, perhaps even one belonging to a number 11 batsman, and still score a century.

Listen to interviews with his contemporary bowlers like Waqar Younis and Wasim Akram, and you'll understand just how highly they regarded Inzamam for his batting genius. Despite his harmless appearance, he could wield the bat with remarkable speed. His batting repertoire included elegant cricketing shots, cheeky placements, and powerful brute force hits, all executed with that extra second. He detested running and preferred dealing in boundaries, shunning the idea of converting ones into twos. He believed in turning singles into fours and sixes.
Another reason why Inzamam is my personal favorite is his authentic persona and straightforward demeanor. He expressed his thoughts candidly and thought in simple terms. He made batting appear effortless and added a touch of grace to the game. These reminiscences harken back to a time when cricket was played in distinct seasons, unlike the continuous format we see today.

Statistics may not always do justice to Inzy bhai's true potential, as numbers can sometimes be deceptive. Inzamam seemed to be born in the wrong cricketing nation. Had he been born in Australia or India, his name would likely have been more prominent in those top five batsmen lists than it is today.

Monday, October 2, 2023

कटिहार जिले की स्वर्ण जयंती के अवसर पर

मेरे गृह जिला कटिहार का पचासवां स्थापना दिवस आज मनाया जा रहा है। 2 अक्टूबर 1973 को तत्कालीन पूर्णिया जिले के एक अनुमंडल से कटिहार एक स्वतंत्र जिला बना। 

गंगा कोशी और महानंदा जैसी प्रमुख नदियों के बीच बसा है कटिहार। जहां यह नदियां कटिहार की उपजाऊ भूमि और भरपूर पेयजल की जरूरत को पूरा करती हैं वहीं बाढ़ की समस्या भी हमारे यहां है। 

इस बात में शायद ही कोई शक हो कि कटिहार अब भी भारत और बिहार से सबसे पिछड़े जिलों में एक है। हालांकि अपने बचपन से अब तक मैने कटिहार को प्रगति करते ही देखा है। यह प्रगति विकास के हर पैमाने पर है। चाहे शिक्षा हो या सड़क या पानी, या बिजली । अस्सी के दशक के कटिहार से आज के कटिहार ने लंबी दूरी तय की है। कटिहार में आज बच्चों के लिए अच्छे स्कूल हैं, फोर लेन सड़कें हैं, चौबीस घंटे बिजली है। 

हां यह बात अलग है कि हमारी विकास दर देश के अन्य क्षेत्रों से थोड़ी कमतर रही है लेकिन हालिया वषों में यह शिकायत भी दूर होती नजर आ रही है। रेल संपर्क में कटिहार हमेशा ही मुख्य धारा से जुड़ा हुआ है। निकट भविष्य में साहिबगंज मनिहारी के बीच बन रहे फोर लेन ब्रिज और उसको जोड़ने वाली फोर लेन सड़क कटिहार को न केवल झारखंड बल्कि उत्तरपूर्व भारत तथा उत्तर भारत से जोड़ेगी। समृद्धि सड़क मार्ग से होकर आती है। इस सड़क के बन जाने के बाद समृद्धि कटिहार की ओर अपना रुख करेगी।

भागलपुर के विक्रमशिला पुल होकर जाने की जरूरत खत्म होने के बाद कटिहार साहिबगंज और मनिहारी में बन रहे मल्टी माडल ट्रांसपोर्ट हब का उपयोग कर कटिहार के कृषक और अन्य उत्पादक अपने उत्पादों के लिए एक बृहद बाजार से जुड़ सकेंगे। 

 कटिहार क्षेत्र अपने आम, मक्का, मखाना , चूड़ा और मछली जैसे उत्पादों को पूरे देश में भेजकर अपनी आय कई गुना बढ़ाने की पूरी संभावना रखता है। अभी तक कटिहार से मुख्यता अकुशल मजदूरों का दिल्ली पंजाब और हरियाणा जैसे क्षेत्रों में पलायन होता रहता है क्योंकि कटिहार में रोजगार की संभावनाएं अभी न्यून मात्रा में ही हैं। कोरोना काल में पूरे बिहार में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर कटिहार जिले में लौटे थे। आशा है शीघ्र ही रोजगार के लिए हो रहे पलायन दर में कमी आयेगी और रोजगार के अनेक अवसर कटिहार में ही उपलब्ध होंगे।

कटिहार के विकास की कक्षा में प्रक्षेपित होने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है और आने वाले समय में कटिहार के तीव्र विकास की गति को कोई भी नकार नहीं सकता। विकास के लिए आवश्यक हर कारक चाहे वो मानव संसाधन हो या अन्य भौतिक साधन , कटिहार में सबकी प्रचुर मात्रा उपलब्ध है। 

अगले पच्चीस साल कटिहार के इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पचास साल होने वाले हैं। आशा है इसमें कटिहार के निवासी, शासन और नीति निर्माता तीनों पूर्ण सहयोग रखेंगे और कटिहार जिले की स्थापना की हीरक जयंती के समय वर्ष 2048 में कटिहार एक विकसित जिला होगा।

अपनी स्वर्ण जयंती के अवसर पर कटिहार विकास के स्वर्ण युग में प्रवेश करे, ईश्वर से यही कामना है। सभी कटिहार वासियों को स्थापना दिवस की स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं।। 

Thursday, September 28, 2023

आज की ताजा खबर

मुद्दतों से ना सुना पूरा सच , ना सच्ची खबर
बेइंतहा अब हमारा इंतजार औ सबर हो गए।

सीमा हैदर हैं आज की भी ताजा खबर
बाकी खबर बासी और बेअसर हो गए।

बेखबर हो गई आवाम,
खबरदार करने वाले जब से बेकदर हो गए।

दफन हो गई असली खबर ,
जब से खबरनवीस खुद खबर हो गए।

इश्तेहारों के बीच घुट रही कहीं खबर
अखबार अब खबरों के कबर हो गए।

बन ठन कर सजी है झूठ की मंडी 
बस सच बोलने वाले दर बदर हो गए।

Wednesday, September 27, 2023

भूतों से डर नहीं लगता साहब!!!

बचपन में सुनी गई कहानियों को याद करता हूं तो बरबस ही याद आता है कि भूतों से बड़ा डर लगा करता था। ऐसा लगता था दुनिया में हर जगह भूत ही भूत हैं। पलंग के नीचे अंधेरे में, स्कूल की बंद पड़ी लाइब्रेरी में, रास्ते में पड़ने वाले पीपल पर, कब्रिस्तान में, श्मशान में, टूटी पड़ी चौकीदार की खोली में। मतलब हर तरफ भूत ही भूत। 

बड़ा होने पर पता लगा कि भूत तो बेचारे बड़े क्यूट से होते हैं। आज तक किसी को परेशान नहीं किया, किसी को मारा पीटा नहीं, किसी के पैसे नहीं छीने, किसी की गर्लफ्रेंड नहीं पटा ली। अगर किसी को परेशान किया भी बस इतना ही कि पीछे से हू  हू की आवाज निकाल दी, गुमनाम है कोई टाइप गाना सुना दिया। जिसको सुनाया उसको जिंदा छोड़ दिया ताकि वो बाकी सबको भूत की कहानियां अपने बुढ़ापे तक सुना सके।भूत बेचारे इतने शरीफ कि आपने हनुमान चालीसा पढ़ी नहीं कि बेचारे समझ जाते हैं कि आप उनका स्वागत नहीं करने वाले और वो चुपचाप से निकल लेते हैं। अब पता चल रहा है कि भूत से ज्यादा परेशान करता है भूतिया। जिस किसी से पूछ लो , वो ही भूतिया लोगों से परेशान है।

 कोई दोस्त नए शहर में गया हो, उसको फोन करो तो कहेगा कि क्या कहूं दोस्त, बाकी सब तो ठीक है लेकिन इस शहर वाले बड़े भूतिया किस्म के लोग हैं। किसी की नई शादी हुई हो तो वो आपको बताएंगे कि उसके ससुराल वाले कितने भूतिया टाइप के लोग हैं। कोई नई फिल्म जिसका बड़ा नाम सुनकर आपने हजार रुपए की टिकट और बारह सौ का पॉप कॉर्न खरीदा, पता चला कि फिल्म का डायरेक्टर भूतिया निकला। 


सड़क पर नई कार लेकर निकलना मुश्किल हो गया है, पता नहीं कौन सा भूतिया रॉन्ग साइड से ओवरटेक करने के चक्कर में बड़ा सा स्क्रैच मार दे। गाड़ी ठीक करवाने के लिए इंश्योरेंस क्लेम करने जाओ तो पता चलेगा कि स्क्रैच मारने वाले से बड़ा भूतिया आदमी तो इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम सेटेल करने वाला एजेंट है। लब्बोलुआब यह कि दुनिया में भूतिया लोगों को ही साम्राज्य है। महान अशोक और सिकंदर दी ग्रेट और चंगेज खान का साम्राज्य इन भूतिया लोगों के साम्राज्य के आगे चाय कम पानी है।


भूतिया साम्राज्य से बच पाना असम्भव है। उसकी पहुंच आपके घर के अंदर तक है। आप अपने आरामदायक सोफे पर डेढ़ लाख रुपए के हाई डेफिनिशन टीवी को खोल कर बैठते हो कि बाहर के भूतिया लोगों से कुछ चैन मिले तो पता चला टीवी पर बिग बॉस आ रहा है। अब बिग बॉस देख कर बता पाना मुश्किल है कि इसमें सबसे बड़ा भूतिया कौन है। उसके पार्टिसिपेंट सेलिब्रिटी , उसका होस्ट या उसको देखने वाले आप। टीवी बंद कर आप अपना नया आईफोन 15 देखने लगते हो तो पता चलता है कि उसमें बैक बटन ही नहीं है। फिर आपको अहसास होता है कि इन भूतियों ने एप्पल जैसी बड़ी कंपनी पर भी कब्जा जमा लिया है। एंड्रॉयड वाले आपका डाटा चुरा चुरा कर आपको भूतिया बनाने में कोई कसर तो पहले से नहीं छोड़ रहे थे।

फिर आप सोचते सोचते सोचने लग जाते हो कि जिस तरह से मुझे सारी दुनिया भूतिया लगती है, कहीं दुनिया की नजर में मैं भी तो भूतिया नहीं हूं। फिर आप सोचते हो कि आखिर मेरे में ऐसा क्या खास है जो मैं इन भूतिया लोगों को भूतिया ना दिखूं । भाई, बड़ा से बड़ा क्रिकेटर जो फाइनल में जीरो पर आउट हो जाता है, बड़ा से बड़ा निर्देशक जो छह सौ करोड़ लगा के एक फ्लॉप फिल्म बनाता है और पूरी दुनिया जो आईफोन के पीछे पागल है, भूतिया हो सकती है ,तो मेरे में ऐसी कौन सी अलग बात है कि मैं भूतिया ना लगूं।

फिर सोचते सोचते आप यूक्लिड ज्यामिति और आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत तक पहु्च जाते हो। फिर आपको पता चलता है कि भूतिया होना कोई निरपेक्ष अवस्था नहीं है, बल्कि भूतिया होना या भूतिया दिखना एक सापेक्ष अवस्था है। जिस प्रकार यूक्लिड की ज्यामिति में किसी भी बिंदु की अवस्थिति का मापन एक निश्चित बिंदु ओरिजिन जिसे (0,0) से निर्धारित करते हैं, से किया जाता है, उसी प्रकार जब आप पूरी दुनिया को भूतिया समझते हो तो आप वास्तव में अपने फ्रेम ऑफ रिफ्रेंस के ओरिजिन से दूसरों के भूतियापा का मापन कर रहे होते हो, ठीक उसी समय दूसरा व्यक्ति अपने फ्रेम ऑफ रिफ्रेंस के ओरिजिन से आपके भूतियापा का मापन कर रहा होता है। अपने फ्रेम ऑफ रेफरेंस और केवल आपके फ्रेम ऑफ रेफरेंस में आपका भूतियापा हमेशा शून्य रहता है, बाकी के सभी फ्रेम ऑफ रेफरेंस से आपका भूतियापा का माप कुछ न कुछ रहता ही है।  अब आप महसूस करते हो कि बिग बॉस के सारे पार्टिसिपेंट वास्तव में भूतिया नहीं हैं, बल्कि भूतिया बनने का नाटक कर रहे हैं ताकि आपको भूतिया बना सकें। उनके फ्रेम ऑफ रेफरेंस में आपका भूतियापा का माप बहुत ही ज्यादा है। आखिर आपके भूतियापे से ही उनका घर चल रहा है और वो सेलिब्रिटी बने घूम रहे हैं।


वैसे भूत और भूतिया लोगों के बारे में इतना पढ़ जाने के बाद भी आपको लग रहा होगा कि यह आलेख तो भूतिया लोगों के बारे में है ही नहीं, बल्कि किसी और टाइप के लोगों के बारे में है। शायद आपको भी लगने लगा होगा कि यहां भी भूतियापा ने पीछा नहीं छोड़ा। मैंने तो शुरू में ही कह दिया था कि इनका साम्राज्य सर्वत्र और सर्वव्यापी है, आप ही नहीं माने। एक भूतिया सी फिल्म का डायलॉग याद आ रहा है कि भूतों से डर नहीं लगता साहब, भूतिया लोगों से लगता है। 


Saturday, September 23, 2023

अंतर्मुखी का अंतर्मन

चीज़ें पहली बार समझ नहीं आती मुझे। औरों से ज्यादा वक्त लेता हूं समझने में, कुछ ज्यादा ही वक्त ले लेता हूं खुलने में।शायद इसीलिए पीछे रह जाता हूं दौड़ में।

नए दोस्त जल्दी नहीं बना पाता, पुरानी दोस्ती भुला नहीं पाता। इसलिए थोड़ा खिंचा सा रह जाता हूं अतीत में बंधकर उसकी यादों के धागों से।शायद इसीलिए पीछे रह जाता हूं दौड़ में।

वर्तमान में खोया रहता हूं और भविष्य की ओर नहीं ताक पाता। आत्मविश्लेषण कुछ ज्यादा कर बैठता हूं, आत्मसम्वाद में जाया कर देता कुछ ज्यादा वक्त। दुनिया को अपना बनाने की जगह अपनी दुनिया में बना रहना भाता है मुझे। शायद इसीलिए पीछे रह जाता हूं दौड़ में।

बोलने से पहले सोचता हूं, कुछ बोलने के बाद उसको दुहराता रहता हूं अपने आप से जैसे कोई खराब घड़ी की सुई अटक सी गई हो। जो देख रही हो बाकी सुइयों को टिक टिक करते हुए, और फिर सोचती हो कि कितना भी टिक टिक करले, पहुंचती तो कहीं नहीं सुइयां। शायद इसीलिए पीछे रह जाता हूं दौड़ में।

किसी से मिलने में कतराता हूं, कोई मिल जाए तो घबराता हूं। सबसे मिल कर रहना चाहता हूं पर किसी से मिलना नहीं चाहता हूं। रहना चाहता हूं अलग, भीड़ से, शोर से और शायद दौड़ से। किसी दौड़ में शामिल होने से पहले हजार बार सोचता हूं कि क्या होगा हासिल इस दौड़ को जीत कर भी। इसीलिए पीछे रह जाता हूं दौड़ में।



Wednesday, September 20, 2023

कहें तो कहें क्या

ट्रुडो भईया ,

पूरा कन्फ्यूजिया दिए हो!! करें तो करें क्या, और बोलें तो बोलें क्या!! ना तुम दिवाली पर हमको भुक भाक करने वाला झालर बेचते हो, और ना हम लोग तुम्हारा बनाया फोन यूज करते हैं , जिसको खरीदना बंद कर दें। आईपीएल में ना तुम्हारे खिलाड़ी खेलने आते हैं जिसको बैन कर दें और ना कामरान अकमल की तरह तुम्हारी अंग्रेजी खराब है जिसका मजाक उड़ा सकें। बांग्लादेश की तरह तुमको आजादी भी नहीं दिलवाए हैं कि उसका ताना मार सके। एक खिलाड़ी कुमार थे जिसको वर्तमान हालात में शायद बॉयकॉट कर देते लेकिन समय रहते ऊ भी पाला बदल लिए। और तो और तुम्हारा आदमी सब इधर आकर नकली आधार भी तो नहीं बनाता है। 

दिमाग भनभना गया है। ठीक वैसे जैसे हमारे बल्लेबाज श्रीलंका और बंगलादेश के खिलाफ राजकोट और इंदौर में 360 रन बनाने के बाद मेलबॉर्न में 36 पर निपट लेते हैं। हमारे बॉयकॉट वाले सभी हथियार का जखीरा सब बेकार लग रहा है। कोई जोक भी नहीं सूझ रहा , आंख भी छोटा नहीं है तुम लोगों का कि बंद आंख वाला चाइनीज जोक तुम पर चिपका देते। सारा प्रैक्टिस पाकिस्तान, चाइना, बांग्लादेश सब पर किए हुए हैं और सिलेबस से बाहर क्वेश्चन आ गया कनाडा पर। क्या करें? कोई फिल्म भी बनाते तो साला जेतना भी स्क्रिप्ट है सब गदर और लगान जैसा ही है, उधर भी तुम्हारा कोई जिक्र तक नहीं है। तुम्हारा मजाक भी कैसे उड़ाएं।

 बस इतना कह सकते हैं कि इंडिया घूमते समय जो तुम शेरवानी और रंगीन कुर्ता पहन पहन के दिखाते हो ना, ऊ सब पालिका बाजार में फुटपाथ पर गोल लोहे वाले आलने पर हैंगर में झूलते हुए 350 रुपया में मिल जाता है। थोड़ा मोल मोलाई करो तो दुकानदार 650 रुपया में दू सेट दे देता है कि आप बोहनी कर रहे हो इसीलिए आपको दे रहे हैं नहीं तो 400 से कम में नहीं देते हैं।

बाकी देखते हैं, अगर ज्यादा दिन ऐसे ही करते रहे तो कुछ जोक वोक सोचना पड़ेगा तुम्हारे लिए भी। उससे पहले सुधर जाओ, वोही ठीक रहेगा। 

एक सामान्य भारतीय!! 
( जिसको वीजा नहीं चाहिए) 

Sunday, September 17, 2023

पोल खोल की पोल खोल

बारिश के दिनों में अकसर सुनता पढ़ता हूं कि तेज बारिश ने नगर निगम की पोल खोल दी। तब समझ नहीं आता कि यह पोल होती क्या है, कहां होती है जो बार बार खुल जाती है। 

पोल चीज ही ऐसी है कि कभी भी किसी की भी खुल सकती है। कितनी भी बार खुल सकती है। कुछ लोगों की पोल साल में एक बार खुलती है जैसे हमारी क्रिकेट टीम की icc टूर्नामेंट के फाइनल में । कुछ लोगों की पोल हमेशा खुलती रहती है। जैसे नेताओं की पोल।सत्ता में रहने वाले नेताओं की पोल अखबार वाले खोलते हैं अगर। और जब विपक्ष में रहे तो सत्ता वाले पोल खोल देते हैं। कभी पार्टी छोड़ गुस्साया नेता कर पोल खोल देता है और कभी होटल में छुपा कैमरा पोल खोल देता है। लेकिन पोल बिना बंधे कैसे खुल जाती है , यह बात भौतिकी के मूल सिद्धांतों को चुनौती देती रहती है। 

और अगर पोल खुलती है तो कोई ना कोई बांधता जरूर होगा ताकि दुबारा खुल सके। पोल बांधने वाला जरूर व्यक्ति बहुत व्यस्त रहता होगा क्योंकि हमेशा दुनिया भर में किसी न किसी की पोल खुलती ही रहती है। जो चीज इतनी खुलती है तो उसको बांधने वाला भी कोई तो होगा। जरा गौर फरमाएं तो आधी दुनिया का काम ही पोल बांधने का है।
किसी की पोल ना खुले इसके लिए बहुत मेहनत लगती है। मेकअप करने और करवाने का पूरा उद्योग ही पोल ना खुलवाने पर आधारित है। चेहरे पर पड़ रही झुर्रियां, कील मुहांसे , दाग , सांवलापन जैसी चीजें जो आपके अक्षत यौवना होने की पोल खोल सकता है , मेकअप के द्वारा ढक दिए जाते हैं। उजड़े चमन सर को अमेजन वर्षा वनों से भी सघन केश राशि से सुसज्जित दिखाने वाले विग भी पोल बांधने वाले बृहत उद्योग का ही एक हिस्सा हैं।

स्तरहीन पटकथा, बकवास अभिनय, और बेढंग नृत्य , इन सबकी पोल खोलने से रोकने के लिए VFX और कंप्यूटर ग्राफिक्स का एक फलता फूलता उद्योग है। गर्दभ राग को भी राग मल्हार बना देने के लिए साउंड मिक्सिंग का सारा प्रपंच रचा जाता है। सारी पीआर इंडस्ट्री सेलिब्रिटी के उदार होने की पोल बांधने का ही तो काम करती हैं। 

सूची अनंत है। अपने आस पास देखिए, दस लोग पोल बांधते नजर आ जायेंगे। । यहां तक कि पोल खोलने वालों की पोल खुल जाती है कि उन्होंने फलां की पोल खोली तो अलां की पोल क्यों नहीं खोली। यह अलां और फलां के बीच ही पोल खोलने वालों को पोल बंधी होती है। लेकिन जिस तरह से हार जन्म लेने वाले की मृत्यु तय है, उसी प्रकार से हर बंधी पोल का खुलना तय है। शाश्वत सत्य है।

 पोलिंग सीजन आ रहा है, पोल खुलने और बंधने का काम युद्ध स्तर पर जारी है। बस नजरें जमाए रखिए और आनंद लेते रहिए। जीवन की दौड़ में पोल पोजीसन पाने का यही तरीका है। 

Tuesday, September 5, 2023

सच का सच

ऐ सच्चाई!! क्योंकि तुम 
हमेशा जीतती हो,
इसीलिए हमेशा जीतने के गुमान
ने तुम्हें बना दिया है इतना घमंडी।

कि हमेशा जीत ने बना दिया 
है तुम्हें कड़वी
कि लोग तुम्हें कड़वी सच्चाई कहते हैं।

कि लगातार जीतने की वजह से
तुम में न बाकी रही कोई शर्म।
कि लोग तुम्हें नंगा सच बुलाने लगे हैं।

सच्चाई , सच तो ये है 
सर्वकालिक सर्वत्र विजेता 
होने के बाद भी
कोई तुम्हारा सामना नहीं करना चाहता
कोई तुमसे नजरें नहीं मिलाना चाहता।

कोई तुम्हें देखना नहीं चाहता
कोई तुम्हें सुनना नहीं चाहता।
लेकिन क्या फर्क पड़ता है तुमको
तुम तो आखिर में जीत ही जाओगी।

सत्यमेव जयते के जय घोष में
दब जायेंगी वो सब आवाजें 
जो बताती हैं सच का सच
कि कितनी बेरुखी, कड़वी और नंगी हो तुम।

Saturday, September 2, 2023

फवाद चौधरी जी आदित्य एल 1 के बाद

हमारी मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में सूरज को लेकर एक प्वाइंट ऑफ व्यू है। सूरज हमें रोज दिख जाता है। उसके उगने और डूबने का समय आसानी से अखबार में मिल जाता है। तो हमें उतने पापड़ बेलने की जरूरत नहीं है। 

हमें पता है कि सूरज बहुत गरम है और वहां इंसानों के बसने के लिए बहुत दिक्कत है। चूंकि वहां गर्मी बहुत है इसीलिए उधर रहने पर एसी का बिल बहुत आएगा। हमारी तंगेहाल तंजीम अभी इतना ज्यादा एसी का बिल चुकाने के लिए राजी नहीं है। 

जहां तक हमें पता चला है कि सूरज से हमें कोई लोन वोन मिलने की भी गुंजाइश कम ही है। जो जितना पैसा लगा कर हम अपने सायंसदानों को सूरज पर भेजेंगे, उससे सस्ते में हमारे वजीर ए आला सऊदी और दुबई जा सकते हैं और वहां से लाख दो लाख कर्जा उधार ला सकते हैं। 

हिन्दुस्तान की आवाम को पैसे खर्चने का शौक है तो वो भेजे अपने सैटेलाइट सूरज पर या उड़ाए अपने पैसे गदर 2 देख कर। हमें ना सूरज पसंद है और ना गदर 2। 

और हिंदुस्तान यह याद रखे कि हम एक शेर मुल्क हैं, और आटा चावल की कमी के कारण भूखे शेर हैं। भूखा शेर कितना खतरनाक होता है, हिंदुस्तान की आवाम और वजीरे आजम को यह पता होना चाहिए। 

हिन्दुस्तान पहले अपने यहां टॉयलेट बनाए । हमसे सीखे। हमने खाना कम कर दिया है, हमने टॉयलेट की जरूरत ही नहीं पड़ती। 

हिन्दुस्तान के साइंटिस्ट भले ही आदित्य L1 और चंद्रयान उड़ा लें, लेकिन हमारा एक एक बच्चा मौका मिलने पर बिना किसी खास तामील के पूरा एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और स्कूल तक उड़ा सकते हैं। हम हैंडपंप से भले थोड़ा डरें, L1 और चंद्रयान से बिल्कुल भी खौफजदा नहीं हैं।

Thursday, August 24, 2023

निजी चंद्रयान 3

शुक्र मनाइए कि इसरो एक सरकारी संस्था है और चंद्रयान तीन एक सरकारी मिशन। वरना चंद्रयान का पूरा नाम होता विमल सिल्वर कोटेड इलायची प्रेजेंट्स चंद्रयान थ्री को-स्पॉन्सर्ड बाय कमलापसंद सुगंधित पान मसाला पावर्ड बाय रूपा यह आराम का मामला है।

प्रज्ञान का नाम होता ड्यूरासेल प्रज्ञान, आम बैटरी चले धरती तक, ड्यूरासेल बैटरी चले चांद तक। विक्रम रोवर को क्लब महिंद्रा हॉलीडेज स्पॉन्सर करती और कहती कि चलें चांद पर घूम आएं। टेक ऑफ , लैंडिंग सब जगह कहीं बनियान चड्डी दिखती तो कहीं मैकडॉवेल म्यूजिक सीडी। चांद की धरती को भी गोरा बनाने वाली क्रीम के विज्ञापन से पाट दिया जाता। चांद जैसा गोरापन पाने के लिए लगाएं फेयर एंड ग्लो।

टीवी पर मुफ्त में चंद्रयान की लैंडिंग नहीं दिखती और ना ही उसका एड फ्री टेलीकास्ट होता। हॉटस्टार का प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लेने वालों मून लैंडिंग को ही देखने को मिलती और के सीवन का इंटरव्यू कट करके नोरा फतेही का स्पेशल डांस परफॉर्मेंस दिखाया जाता। 

कुछ चीज़ें सार्वजनिक ही अच्छी हैं, जहां पर काम करने का कारण मुनाफा कमाने की होड़ की जगह कुछ नया पाना होता है। कुछ चीज़ें सरकारी ही अच्छी हैं। 



Monday, August 14, 2023

बुढ़ापा गदर और रजनीकांत



गदर चीज ही ऐसी है जो अक्सरहां बुड्ढे ही मचाते हैं। फिल्मी पर्दा हो तो 65 साल के सनी पाजी गदर मचाते हैं और असली जिंदगी वाला गदर हो तो 80 साल के बाबू कुंवर सिंह । 

जवानी तो कमबख्त काम करने और आटा चावल जमा करने में गुजर जाती है। उसके पास गदर के लिए वक्त कहां। और अगर वक्त निकाल भी लें तो वह अनुभव कहां । बुढ़ापे में वक्त भी है और अनुभव भी है । बुढ़ापे में खोने के लिए बचता नहीं। और जिसके पास खोने के लिए कुछ नहीं है वह सब कुछ पाने के लिए जान लगा देता है । 

गदर के बाद ही स्वतंत्रता मिली है। इसकी कीमत समझें और सोच समझ कर उपभोग करें । वो महंगी वाली बोतलों पर लिखा रहता है ना कि Drink Responsibly!! स्वतंत्रता के साथ भी ऐसा ही है। बिना सोचे समझे अगर ज्यादा सर को चढ़ा ली तो बस नाली में जाकर गिरना तय है। बाकी चलिए रहा है। 

वैसे आप कहोगे 65 साल के सनी पाजी को आप बुड्ढा कहते हो और 72 साल के रजनीकांत सर जिनकी फिल्म जेलर भी गदर के साथ ही रिलीज हुई है उनको बुड्ढा नहीं कहते । तो हम कहेंगे कि रजनीकांत को बुढ़ापा नहीं आता , बुढ़ापे को रजनीकांत आता है और जब बुढ़ापे पर रजनीकांत आ जाता है तो वही बुढ़ापा गदर मचाता है। 

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

Friday, July 21, 2023

Tips for better promotion of Oppenheimer in India..

Sabse pahle to Cillian Murphy ko bigg Boss ott ke weekend ka war wale special episode per bhejiye.. wahan per Salman Khan ke saath Murphy bhaiya bigg Boss inmates ko road safety aur ladies ki izzat kaise karte hain wale moral lessons denge aur mujhse shaadi karogi Wale gaane per ek do step karke dikhayeenge..

Robert Downey Jr India's best dancer per Jaa sakte hain.. udhar wo judges ke saath chair per baith kar Geeta maa aur sonali bendre ke saath thoda flirt karein, aur phir har ek contestant ka bachpan wala woh sapna poora karein jismein unhone apne aap ko iron man ke saath thumke lagate hue dekha tha.. do char contestant ki dukh bhari kahani sun ke aason baha dein to Oppenheimer ki chandi ho jaaye..

Emily blunt ko Kapil Sharma show per bhejiye.. wahan Kapil Sharma unse poochhenge ki Oppenheimer karne ke baad kya unhone socha tha ki unko Kapil Sharma show per aane ka mauka milega.. uske baad Krishna aur Kapil dono Hindi mein koi cheesy baat bol ke Emily blunt ko flirt karenge. Last mein kiku Sharda Emily se poochenge ki atomic bomb ki aawaz jayada tez hai ya Archana ji ki hasi!!

Matt Damon kaawaliya kaawaliya Wale gaane per reel bana kar Rajni sir se unke Ghar per mil sakte hain.. unka ashirwad lekar Oppenheimer ka Tamil version release kar sakate Hain aur phir Aisa koi hint de sakte hain ki Oppenheimer 2 mein Rajni sir ka guest appearance wala ek role hoga.. ya Oppenheimer actually KGF universe se related hai..
Finally Nolan saab Gorakhpur per jaaker yogi ji ke saath Gita press Gorakhpur Jaa sakte hain jahan woh kahenge ki Oppenheimer to bahana hai, asli to Gita sabko sabko samjhana hai.. uske baad shayad Oppenheimer UP mein tax free ho jaay. Lekin ek risk yeh bhi hai ki shayad iske baad Oppenheimer west Bengal mein ban ho jaay.. lekin kuch paane ke liye kuch khona padta hai, Aisa gita mein hi likha hai..

Baaki bache hue star cast log bade influencers jaise Sofia ansari aur Ranu mandal ke saath kacha badam Wale gaane per dance karke film ko promote kar sakte hain..

Yaad rakhiye, Gita ke aathve adhyay mein Sanjay apni divyadrishti se dekhkar batate Hain ki kaliyug mein Bina VFX ke film ban jaroor ban to sakti hai lekin Bina promotion ke India mein chal nahin sakti...